अमित के लिए दिल्ली-हरियाणा के सैकड़ों लोगों ने बिछाए पलक: वर्ल्ड एथलीट चैंपियनशिप के अंडर-20 में 10 हजार मीटर रेस वॉक में रचा इतिहास, 700 लोग होंगे स्वागत समारोह में शामिल; मां बना रही गुड़ का चूरमा

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रोहतक3 घंटे पहले

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केन्या में वर्ल्ड एथलीट चैंपियनशिप में अंडर-20 कैटेगरी में पैदल चाल में सिल्वर मेडल जीतने के बाद रोहतक के अमित।

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देश का नाम रौशन करने वाले जिले के गांव इस्माइला का 17 वर्षीय अमित खत्री बुधवार को गांव लौट रहा है। मां लाडले के लिए गुड़ का चूरमा खिलाएंगी, वहीं 700 से ज्यादा लोग इतिहास के स्वागत के साक्षी बनने को तैयार हैं। अमित ने केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित वर्ल्ड एथलीट चैंपियनशिप में अंडर-20 कैटेगरी में 10 मीटर की रेस वाक में सिल्वर मेडल जीता है। वह मंगलवार शाम को दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा था। आज पहले दिल्ली की अकादमी के प्लेयर उनका स्वागत करेंगे, फिर बहादुरगढ़ की डॉ. ललित भनोट एथलीट अकादमी में स्वागत कार्यक्रम किया जाएगा। दोपहर बाद अमित का ‌उसके गांव इस्माइला में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत कार्यक्रम किया जाएगा। गांव में हलवाई भी सुबह ही पहुंच चुके हैं। टैंट भी लग चुका है।

अमित के घर पर स्वागत समारोह के लिए की जा रही तैयारियां।

अमित के घर पर स्वागत समारोह के लिए की जा रही तैयारियां।

ऐसा रहा अमित का सफर
अमित के खेल के सफर की बात करें तो यह बड़ा ही संघर्षपूर्ण रहा है। अमित ने छह साल पहले 2014 में 11 की उम्र में गांव की सड़कों पर ही पैदल चलने की प्रैक्टिस शुरू की थी। इसके बाद वह बहादुरगढ़ की डॉ. ललित भनोट एथलीट अकादमी में चले गए। यहां डेढ़ साल रहे, मगर इस अकादमी में तब संसाधनों की कमी के कारण अमित पर फोकस नहीं हो सका। 2016 में यहां से वह अपने गांव के ही एक युवक के साथ एनआईएस पटियाला चले गए, मगर वहां भी किसी ने नहीं सिखाने पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद वह 2017 में पटियाला की एक एथलीट सपना पूनिया (ओलंपियन), जो राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर सेवारत हैं, उनके साथ जयपुर अकादमी में पहुंच गए। उन्होंने अमित को कुछ सिखाने की कोशिश की, मगर नौकरी के कारण उन्हें गेम छोड़ना पड़ा। उन्होंने पटियाला में सीनियर खिलाड़ी चंदन सिंह के जरिए अमित पर फिर से वहां भेजने और उस पर फोकस करने की सिफारिश की। 2017 नवंबर में अमित फिर से पटियाला चले गए। तीन साल एक राज्य से दूसरे राज्य में भटकने के बाद 2018 शुरुआत में अमित का अभ्यास सही से शुरू हुआ।

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तिरंगा ओढ़े हुए अमित खत्री, जिनके पास संघर्ष और उपलब्धियों की लंबी लिस्ट है।

तिरंगा ओढ़े हुए अमित खत्री, जिनके पास संघर्ष और उपलब्धियों की लंबी लिस्ट है।

2018 में अंडर-16 में तोड़ा था 1990 का रिकॉर्ड
2018 में अमित ने पहला मैच खेला। मई माह में ऊटी में हुई 5 हजार मीटर नेशनल अंडर-16 पैदल चाल में अमित ने 1990 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 21 मिनट 17 सेकेंड में पूरी कर दी, जो पहले 21 मिनट 56 सेकेंड का रिकॉर्ड था। यहां गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद अमित के खेल को नई उड़ान मिली। मई 2019 में अंडर-18 दस हजार मीटर पैदल चाल को 43 मिनट 37 सेकेंड में पूरी करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इस साल नवंबर में हुई जूनियर नेशनल एथलीट अंडर 16 में 5 हजार मीटर पैदल चाल को 20 मिनट 27 सेकेंड में पूरा करते हुए 2018 का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और गोल्ड मेडल हासिल किया। फरवरी 2020 में रांची में हुई इंटरनेशनल वॉकिंग चैंपियनशिप में अमित ने अंडर-20 कैटेगरी में भाग लिया और इंडिया के खिलाड़ी द्वारा बनाए गए 2018 के रिकॉर्ड को तोड़ा और गोल्ड मेडल हासिल किया। अमित ने दस हजार मीटर की इस प्रतियोगिता में पंजाब के अक्षयदीप का 40 मिनट 48 सेकेंड के रिकॉर्ड को 40 मिनट 27 सेकेंड में पूरा कर दिया। जनवरी-फरवरी 2021 में भोपाल में आयोजित जूनियर फैडरेशन अंडर-20 में 10 हजार मीटर पैदल चाल को 40‌ मिनट 40 सेकेंड में पूरा करके गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद गोवाहाटी में जूनियर अंडर-18 में गोल्ड, मई में पंजाब के संगरूर में आयोजित 10 मीटर में गोल्ड हासिल कर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में महज 7 सेकेंड से चूके अमित, पानी की बोतल पकड़ने की टाइमिंग में हो गई थी चूक हालिया मुकाबले में आयोजित इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में अमित महज 7 सेकेंड से गोल्ड से चूक गए। दरअसल, अमित को वहां के मौसम में खुद को ढालने का बहुत ज्यादा समय नहीं मिला। गेम के दौरान उससे दो बार पानी की बोतल पकड़ने में चूक हो गई। इस समय उन्हें अपनी गेम को ऊपर उठाना था, उस समय वह पानी की बोतल लेने के लिए चला गया था। इस वजह से वह 7 सेकेंड की दूरी से चूके और सिल्वर मेडल हासिल किया।

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दो भाइयों में छोटा है अमित, पिता BSF में हैं हवलदार अमित के पिता सुरेश कुमार BSF में हवलदार हैं। अमित का एक बड़ा भाई सुमित है, जो सरकारी एग्जाम की तैयारी कर रहा है। मां प्रमिला गृहणी है। चाचा रमेश की 16 साल की बेटी तमन्ना कबड्डी की नेशनल खिलाड़ी है। तमन्ना के 12 वर्षीय छोटे भाई अंशू का खेलो इंडिया में सलेक्शन हो गया है। ताऊ धर्मसिंह सेना से नायब सूबेदार पद से रिटायर्ड हैं।

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