एनर्जी क्राइसिस: क्रूड और कोयला दे सकते हैं देश को दोहरा झटका; बढ़ा सकते हैं महंगाई, ग्रोथ में अटका सकते हैं रोड़ा

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28 मिनट पहले

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास। शुक्रवार की पॉलिसी मीटिंग में RBI पर एनर्जी क्राइसिस और क्रूड में महंगाई का बड़ा दबाव होगा।

इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में तेजी और देश में कोयले की किल्लत महंगाई बढ़ाते हुए तेज आर्थिक तरक्की की राह में रोड़ा अटका सकती है। ये बातें काफी अहम हैं क्योंकि इसी हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पॉलिसी मीटिंग होने वाली है, जहां ब्याज दरें बढ़ाए जाने का अनुमान पिछले कुछ दिनों से लगाया जा रहा था।

कोयले की कमी बंद करा सकती है फैक्ट्रियां

देश में लगभग 70% बिजली कोयले से बनाई जाती है और लगभग 85% क्रूड का इंपोर्ट किया जाता है। कोयले की कमी फैक्ट्रियां बंद करा सकती है, जो दिक्कत वाली बात है। ऐसे में क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बढ़ सकता है। वह भी तब, जब इंटरनेशनल मार्केट में उसकी कीमत सात साल के ऊंचे स्तर पर चल रही है और इकोनॉमी पर दबाव बना रही है।

करेंसी और बॉन्ड मार्केट पर भारी दबाव

फ्यूल (क्रूड ऑयल और कोयले) से जुड़ी दोनों घटनाओं के चलते महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने के आसार से करेंसी और बॉन्ड मार्केट पर भारी दबाव बना है। इस महीने एशियाई करेंसी में रुपया सबसे कमजोर रहा है जो बुधवार को डॉलर के मुकाबले 0.2% कमजोर होकर 74.60 पर चला गया था। 10 साल के बॉन्ड की यील्ड मंगलवार को अप्रैल 2020 के बाद के उच्चतम स्तर 6.28% पर पहुंच गई थी।

‘दोनों घटनाएं देश के लिए आर्थिक झटका’

नोमुरा होल्डिंग्स इंक की चीफ इकोनॉमिस्ट- इंडिया और एशिया, सोनल वर्मा कहती हैं, ‘दोनों घटनाएं देश के लिए आर्थिक झटका हैं। उनके चलते महंगाई बढ़ सकती है, इकोनॉमिक ग्रोथ कम हो सकती है और बजट घाटे के साथ व्यापार घाटा बढ़ सकता है। महंगाईं का दबाव बढ़ते रहने से मांग में कमी आना शुरू हो जाता है।’

कोर इनफ्लेशन 6% रहने की आशंका

डोएचे बैंक के मुताबिक खुदरा महंगाई दर फिलहाल RBI के कंफर्ट जोन (4% से 2% ऊपर या नीचे) यानी 2% से 6% की रेंज में है। लेकिन कोर इनफ्लेशन के कम-से-कम अगले छह महीनों तक 6% के पास बने रहने की आशंका है। कोर इनफ्लेशन में तेज उतार चढ़ाव के जोखिम वाले खाने-पीने के सामान और ईंधन में महंगाई शामिल नहीं होती।

रेपो रेट जस-का-तस रख सकता है RBI

सप्लाई में रुकावट के चलते महंगाई बढ़ने पर उसे संभालना RBI के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए वह अहम उधारी दर (रेपो रेट) को रिकॉर्ड निचले स्तर पर बनाए रखना चाहता है। रूस और ब्राजील जैसे विकासशील देशों ने महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट बढ़ाए हैं। लेकिन अर्थशास्त्रियों पर कराए गए ब्लूमबर्ग के सर्वे के मुताबिक रिजर्व बैंक शुक्रवार को रेपो रेट जस-का-तस रख सकता है।

महंगाई और नकदी पर RBI के रुख पर होगी नजर

बॉन्ड ट्रेडरों का ध्यान इस बात पर होगा कि रिजर्व बैंक ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में तेजी, महंगाई और सिस्टम में नकदी को लेकर क्या अनुमान देता है। उन्होंने पॉलिसी नॉर्मलाइजेशन के लिए RBI की तरफ से बॉन्ड की खरीदारी की रफ्तार घटाए जाने और बाजार से नकदी निकाले जाने की संभावनाओं के हिसाब से अपनी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी को एडजस्ट करना शुरू कर दिया है।

3.50% किया जा सकता है रिवर्स रेपो रेट

सिटीग्रुप के मुताबिक रिवर्स रेपो रेट (इस रेट पर बैंक एक्सेस फंड RBI के पास जमा करा सकते हैं) को 15 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.50% किया जा सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की लीड इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा कहती हैं, ‘ऊर्जा संकट और विदेश में बढ़ी ब्याज दरों के चलते मुमकिन है कि विदेशी निवेशकों ने इमर्जिंग मार्केट में ज्यादा रिस्क प्रीमियम मांगना शुरू दिया है। इससे यहां गिरावट आने का खतरा पैदा हुआ है।’

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