टैक्स की बात: प्रॉपर्टी और सोना बेचने से हुए प्रॉफिट पर भी देना होता है टैक्स, निवेश की अवधि के हिसाब से होता है टैक्स का कैल्कूलेशन

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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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वित्त वर्ष 2020-21 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR) करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर तय की गई है। ITR फाइल करते समय सभी इनकम और केपिटल गेन्स की सही जानकारी देना जरूरी होता है। जब आप प्रॉपर्टी या सोना बेचते हैं तो आपको इससे होने वाले कैपिटल गेन पर टैक्स देना होता है तरीके के हिसाब से रहती है। अगर आप टैक्स नहीं चुकाते हैं ये टैक्स चोरी मानी जाएगी। सीए अभय शर्मा आपको बता रहे हैं कि प्रॉपर्टी या सोना बेचने से हुए कैपिटल गेन पर कितना टैक्स देना होता है।

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किस तरह के गोल्ड पर कितना टैक्स?

फिजिकल गोल्ड
फिजिकल गोल्ड में जूलरी और सिक्कों के साथ अन्य सोने की चीजें शामिल होती हैं। अगर आपने सोना 3 साल के अंदर बेचा है तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस बिक्री से होने वाले फायदे पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं अगर सोने को 3 साल के बाद बेचा है तो इसे लॉग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 20.8% टैक्स देना होता है।

गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ETF
गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले लाभ पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्स लगता है। इसको लेकर इनकम टैक्स के कोई अलग से नियम नहीं है।

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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है। लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी अगर आप इस स्कीम से पैसा निकालना चाहते हैं तो 5 साल के बाद निकाल सकते हैं। हालांकि अगर आप रिडेम्पशन विंडो (खुलने के 5 साल बाद) के पहले या सेकेंड्री मार्केट के जरिए बाहर निकलते हैं तो फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ETF पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

गोल्ड बॉन्ड 2.50% की दर से ब्याज का भुगतान करते हैं और यह ब्याज आपके टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह से टैक्सेबल है। वहीं 8 साल पूरे होने पर इससे होने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री रहता है।

प्रॉपर्टी बेचने पर कितना देना होता है टैक्स?
इनकम टैक्स कानून के हिसाब से अगर प्रॉपर्टी खरीदने के 2 साल के अंदर बेच दिया जाए तो इससे होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाता है। घर या प्लॉट बेचने से हुए मुनाफे की इस रकम को आपकी कुल आमदनी में जोड़ा जाएगा और उसके बाद आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से इस पर टैक्स वसूला जाएगा।

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अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने के बाद 2 साल रखते हैं और फिर उसे बेचते हैं तो इससे होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा। इस तरह की आमदनी पर आपको इंडेक्सेशन (समय के हिसाब से प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने ) के लाभ के बाद 20.8% के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ेगा।

रेजिडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी पर मिलता है टैक्स छूट का फायदा
इनकम टैक्स एक्ट के तहत घर की बिक्री से हुए कैपिटल गेंस पर भी टैक्स लगता है। लेकिन आयकर कानून के सेक्शन 54 के तहत अगर कोई व्यक्ति निर्धारित समय के अंदर इस रकम से दूसरा घर खरीदता है तो, नए घर में निवेश की गई रकम टैक्सेबल कैपिटल गेंस से घट जाती है। सेक्शन 54 में छूट लेने के लिए एक नई रेजिडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी खरीदी जाए या मकान बनाया जाए। ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

कैपिटल गेन क्या है?
मान लीजिए आपने कुछ साल पहले किसी प्रॉपर्टी या सोने में 1 लाख रुपए निवेश किया था। जो अब बढ़कर 2 लाख हो गया है तो इसमें 1 लाख रुपए को कैपिटल गेन माना जाएगा। इस पर ही आपसे टैक्स लिया जाएगा।

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