स्पिनर पूनम यादव के कोच का इंटरव्यू: मनोज कुशवाहा बोले- पूनम की गुगली का सामना करने से बचते थे लड़के, हर कोई चाहता था कि पूनम उनकी टीम में हो

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आगरा8 मिनट पहले

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पूनम यादव ने घरेलू क्रिकेट में मध्य क्षेत्र, उत्तर प्रदेश और रेलवे के लिए खेलकर अपने क्रिकेट की शुरुआत की। उन्होंने 2013 में महिला टी- 20 इंटरनेशनल टूर्नामेंट में बांग्लादेश के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में पदार्पण किया। पूनम 2017 वनडे वर्ल्डकप में दूसरी बार फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम की सदस्य रहीं। वे 2017 वर्ल्डकप में भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने 9 मैचों में 11 विकेट लिए थे, जबकि दीप्ति शर्मा 12 विकेट लेकर टॉप पर थीं।

पूनम की फिरकी से न केवल विपक्षी खिलाड़ियों को परेशानी होती है, बल्कि उनके साथ खेलने वाले लड़के भी उनकी गेंद का सामना करने से बचते थे। क्लब के लड़के चाहते थे, कि वे पूनम की टीम में ही रहें। आइए पूनम के कोच मनोज कुशवाहा से उनके गेंदबाज बनने के सफर को जानते हैं।

पूनम आपके पास कब से ट्रेनिंग कर रही हैं? क्या इनके परिवार में कोई और भी क्रिकेटर रहा है?
पूनम 2010 से मेरे पास ट्रेनिंग कर रही है। मेरे पास आगरा के एकलव्य स्टेडियम में आने से पहले वह अंडर-19 यूपी स्टेट के लिए खेल चुकी थी। पूनम के पिता आर्मी में एजुकेशन से जुड़े हुए थे। अब रिटायर्ड हो चुके हैं और इंटरकॉलेज में टीचर हैं। पूनम चार भाई-बहन हैं। पूनम से एक बड़ा भाई और बड़ी बहन है। जबकि एक भाई उनसे छोटा है। पूनम ने क्रिकेट की शुरुआत अपने बड़े भाई के साथ गली-मोहल्ले में खेलकर की।

क्या आप केवल गर्ल्स को ट्रेनिंग देते हैं, या लड़का- लड़की एक साथ ट्रेनिंग करते हैं?
पूनम जब मेरे पास ट्रेनिंग के लिए आई थी, उससे पहले दो लड़कियां ही मेरे पास ट्रेनिंग कर रही थीं। ऐसे में लड़कों के साथ ही लड़कियों को भी ट्रेनिंग देता था।

पूनम लड़कों के साथ ट्रेनिंग लेती थीं, ऐसे में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
पूनम को लड़कों के साथ ट्रेनिंग लेने में कोई दिक्कत नहीं आई, बल्कि लड़कों को पूनम की गुगली से खतरा जरूर महसूस होता था। कई बार प्रैक्टिस मैच में लड़कों की चाहत होती थी, कि पूनम उनकी टीम में हो, ताकि बल्लेबाजी के दौरान पूनम का सामना उनके साथ न हो।

वहीं, पूनम के पेरेंट्स ने मुझे बताया था कि स्टेडियम में ट्रेनिंग के लिए आने से पहले वह घर के पास ही ग्राउंड में लड़कों के साथ खेलती थी। पूनम उनको जल्दी आउट कर देती थी, ऐसे में लड़कों ने उनसे अनुरोध किया था कि पूनम को क्रिकेट खेलने के लिए न भेजें।

पूनम ट्रेनिंग को लेकर कितना गंभीर रहीं?
पूनम में क्रिकेट को लेकर एक अलग तरह का जुनून था। बेशक ट्रेनिंग के लिए लड़के समय पर न पहुंचें, पर पूनम हमेशा समय पर पहुंचती थी। उसकी आदत इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने के बाद भी बरकरार है। कुछ साल पहले पूनम को इंग्लैंड में सम्मानित किया जाना था। पूनम वहां से दोपहर 2 बजे लौटी और 3 बजे वह जिम में वर्क करने के लिए पहुंच गई।

पूनम से वर्ल्डकप में आपको क्या उम्मीद है?
पूनम अनुभवी गेंदबाज है। 2017 वर्ल्डकप में वह 11 विकेट लेकर भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे स्थान पर थी। मुझे इस वर्ल्डकप में भी उससे बेहतर गेंदबाजी की उम्मीद है। मुझे पूरा भरोसा है कि वह इंडिया को इस बार वह वर्ल्डकप दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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