NCLT ने दिया ऑर्डर: वीडियोकॉन के प्रमोटरों की संपत्तियां होंगी जब्त, लॉस में जाने पर भी लोन मिलने पर उठे सवाल

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17 मिनट पहले

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वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत। -फाइल फोटो।

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  • FY2014 में 10,028 करोड़ का रिजर्व और सरप्लस FY2019 में माइनस 2,972 करोड़ हो गया
  • इस दौरान कंपनी का सिक्योर्ड लोन 20,149.23 करोड़ से बढ़कर 28,586.87 करोड़ हो गया
  • NCLT ने डूबती कंपनी को लोन देते रहने, फिर दिवालिया घोषित करने की अर्जी देने पर आश्चर्य जताया

नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटरों के बैंक खाते फ्रीज करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया है। ट्राइब्यूनल ने यह ऑर्डर कंपनी मामलों के मंत्रालय की उस नई याचिका पर दिया है, उसमें उसने मामले में रिकवरी बढ़ाने के लिए वीडियोकॉन के प्रमोटरों की संपत्तियां जब्त करने की इजाजत मांगी थी।

वीडियोकॉन के प्रमोटरों के निवेश वाली सिक्योरिटीज फ्रीज की जाएं

NCLT की मुंबई बेंच ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) से कहा है कि उसके पास किसी कंपनी या सोसाइटी में वीडियोकॉन के प्रमोटरों के निवेश वाली जो भी सिक्योरिटीज हों, उनको फ्रीज कर दिया जाए।

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CDSL और NSDL को ऐसी सिक्योरिटीज को बेचे जाने या उनका हस्तांतरण होने से रोकने का भी आदेश दिया गया है। दोनों डिपॉजिटिरी सर्विसेज को केस से जुड़ी हर कार्रवाई का ब्योरा कंपनी मामलों के मंत्रालय को देने के लिए भी कहा है।

प्रमोटरों के बैंक खाते फ्रीज कराने में मदद करें CBDT और IBA

ट्राइब्यूनल ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) से कहा है कि उसके पास वीडियोकॉन के प्रमोटरों की संपत्तियों के बारे में जो भी जानकारी है, उसे शेयर करे, ताकि उनको फ्रीज किया जा सके या बेचे जाने से रोका जा सके।

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NCLT ने 31 अगस्त को जारी आदेश में इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) से वीडियोकॉन के प्रमोटरों के सभी बैंक खातों और लॉकर्स की जानकारी निकालने और उन्हें तुरंत फ्रीज कराने में मदद करने के लिए कहा है।

सरकार ने कंपनी में कुप्रबंधन को लेकर याचिका दायर की थी

ट्राइब्यूनल ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को यह अधिकार दिया है कि वह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर वीडियोकॉन के प्रमोटरों की सभी चल-अचल संपत्तियों की पहचान करने और उनका ब्योरा देने के लिए कह सके।

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मिनिस्ट्री ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत, कंपनी के दूसरे पूर्व निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कंपनी कानून की धारा 241 और धारा 242 के तहत याचिका दायर की थी। ये धाराएं कंपनी में कुप्रबंधन से जुड़ी हैं।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस पांच साल के भीतर हुआ नेगेटिव

ट्राब्यूनल ने कहा कि वीडियोकॉन ने वित्त वर्ष 2014 में 10,028.09 करोड़ रुपए का रिजर्व और सरप्लस दिखाया था। यह आंकड़ा पांच साल के भीतर वित्त वर्ष 2019 में नेगेटिव में 2,972.73 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान सिक्योर्ड लोन भी 20,149.23 करोड़ रुपए से बढ़कर 28,586.87 करोड़ रुपए हो गया।

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NCLT की बेंच ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि किस तरह वित्तीय संस्थान एक डूबती कंपनी को लोन देने के लिए आगे आए। उन्होंने ही फिर IBC के सेक्शन-7 के तहत याचिका दी और उसे दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। इससे लोगों के मन में सवाल उठते हैं।

मामले की जांच करे मंत्रालय, सामने लाए फर्जीवाड़े की कहानी

बेंच ने मंत्रालय को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। उसने कहा कि जब तक यह पता नहीं चल जाता कि कंपनी ने किस तरह कर्ज जुटाया, फर्जीवाड़े की पूरी कहानी सामने नहीं आ पाएगी। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

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